Class 12 pol. Science Chapter -4 ( भारत के विदेशी संबंध )महत्वपूर्ण प्रश्न , 6 Marks

 2 Marks Question And answer 

Q. No. 1) 1971 में हुए भाजपा संघर्ष के दो प्रमुख परिणाम कौन से थे ? 

A.)   बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र का उदय हुआ |

     इस युद्ध के प्रचार इंदिरा गांधी को लोकप्रिय में अत्यधिक वृद्धि हुई और उनके राज्यों में कांग्रेस             पार्टी बड़ी बहुमत से विजय हुई |

Q. No. 2) शिमला समझौता क्या था ? इस पर हस्ताक्षर करने वालों के नाम लिखिए |

A.क ) शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान में 1971 के युद्ध के पश्चात किया गया था |
ख) इस पर हस्ताक्षर करने वालों में भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो थे |

Q. No. 3) जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति के दो उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए |

A. ) जवाहरलाल नेहरू के देश नीति के निम्नलिखित दो उद्देश्य थे |

A.1) कठिन सिंगर से प्राप्त संप्रभुता को बचाए रखना |

A. 2) तेज रफ्तार से आर्थिक विकास करना |

A. 3) क्षेत्रीय खंडिता को बनाए रखना |

Q. No. 4) दलाई लामा ने भारत में शरण क्यों ली ?

A. ) 1950 में चीन नीति पद पर नियंत्रण कर लिया तो ज्यादातर लोगों ने इसका विरोध किया 1958 में चीनी लोगों के विरुद्ध तिब्बत में सशस्त्र विद्रोह हुआ इस विद्रोह को चीन की सेनो ने दबा दिया स्थिति बिगड़ती देखकर 1959 में दलाई लामा ने भारत में प्रवेश किया और भाषा शरण मांगी |

Q. No. 5) भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति क्या है ? (IMP)

A.1) भारत में सजग और सचित रूप से अपने को दोनों मां शक्तियों के खेमा बंदी से दूर रखा है

A. 2) भारत ने उपनिवेशों के चंगुल से मुक्त हुए नए स्वतंत्र देश के महा शक्तियों के खेल में जाने का विरोध किया है |

A. 3) भारत में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर स्वतंत्र रवि या अपना या उदाहरण नेट 56 में जब ब्रिटेन ने स्वेज नहर के प्रश्न पर मिश्रा पर हमला किया तो भारत ने हमले के विरोध विश्व व्यापी विरोध की अगुवाई की |

Q. No. 6)  भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद के किन्हीं दो प्रमुख मुद्दों का वर्णन कीजिए जिनके कारण 1971 का युद्ध हुआ |

A.1 ) पूरी पाकिस्तान की जनता ने अपने क्षेत्र को पाकिस्तान से मुक्त करने के लिए संघर्ष छेड़ दिया जिसके फल स्वरुप 80 लाख शरणार्थी भारत आए और उनका खर्च भारत को उठाना पड़ा

A. 2)  पाकिस्तान और चीन एक दूसरे के नजदीक आए इसके भारत में खतरा महसूस किया भारत ने इसके उत्तर में सोवियत संघ के साथ 1971 में शांति और मित्रता की 20 वर्षीय एक संधि पर हस्ताक्षर किया |

6 Marks Question And Answer |

Q. No. 1) भारतीय विदेश नीति के किन्हीं चार सिद्धांतों का आकलन कीजिए |(IMP )

A. 1) गुटनिरपेक्षता की नीति- भारत के नीति गुटनिरपेक्ष के की रही है एक भी आज सोवियत संघ के विघटन के पश्चात अमेरिका का वर्चस्व है परंतु गुटनिरपेक्षता आज भी प्रासंगिक है भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विवादों का समर्थन गुणात्मक आधार पर करता है इस प्रकार भारत सभी देशों से आर्थिक व अन्य प्रकार की सहायता प्राप्त करने में सफल हुआ |

A. 2) अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा - भारत की नीति विदेश में शांति व सुरक्षा की स्थापना करना है भारत सभी विवादों का हल बातचीत द्वारा करने के पक्ष में है इसीलिए वह पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के साथ भी अपने मतभेदों को बातचीत के द्वारा सुलझाने के लिए प्रत्यनशील रहा है |

A. 3) संयुक्त राष्ट्र संघ( UNO)  का समर्थन - विश्व में अंतरराष्ट्रीय शांति की स्थापना में भारत ने सदा संयुक्त राष्ट्र संघ की गतिविधियों का समर्थन किया और अपना योगदान दिया आवश्यकता पड़ने पर अपनी शांति सेवा भी भेजी है |

A. 4) निशस्त्रीकरण - शीत युद्ध के दौरान शास्त्रों की दौड़ का भारत में विरोध किया भारत ने प्रारंभ से ही परमाणु हथियारों के प्रयोग और निर्माण का विरोध किया भारत एक व्यापार और समानता के आधार पर बिना किसी भेदभाव की निशस्त्रीकरण के पक्ष में है ताकि विश्व में शांति स्थापित हो सके |

Q. No. 2) भारत की परमाणु नीति के संक्षेप में व्याख्या कीजिए  |( IMP )

A.  ) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू गति के साथ आधुनिक भारत का निर्माण करना चाहते थे तथा उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सदा विश्वास प्रकट किया उनकी औद्योगीकरण की नीति का एक घटक परमाणु कार्यक्रम भी था इसकी शुरुआत भूमि जहांगीर बाबा के निर्देश में हुआ भारत के परमाणु नीति के विशेषताएं निम्नलिखित है |

A. 1) भारत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए अणु ऊर्जा के निर्माण के पक्ष में नेहरू पर नेहरू परमाणु हथियारों के विरुद्ध विरुद्ध थे और इसीलिए उन्होंने महा शक्तियों के व्यापक परमाणु की शक्ति करण पर जोड़ दिया 1964 में चीन द्वारा परमाणु परीक्षण की पश्चात अनु शक्ति संपन्न देश अर्थात संयुक्त अमेरिका सोवियत संघ ब्रिटेन फ्रांस और चीन ने जो संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थाई सदस्य भी है 1968 में विश्व के अन्य देश परमाणु अप्रसार संधि को लागू करना चाहा तो भारत ने इस संधि का वह भेदभावपूर्ण कहा और हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया |

A. 2) भारत ने 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया और उसको शांतिपूर्ण परीक्षण का भारत का कहना है कि वह अनु शक्ति को केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए प्रयोग करने के लिए संकल्प लेता है भारत में परमाणु अप्रसार के लक्षण को उदाहरण में रखकर की गई संधियों का विरोध किया क्योंकि यह संध्या उन देशों पर लागू होनी चाहिए जो परमाणु शक्ति से हैं थे भारत ने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया भारत ने अपनी परमाणु नीति में कहा है कि वह अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखेगा परंतु इन हथियारों का प्रयोग पहले नहीं करेगा |

A. 3) भारत की परमाणु नीति में यह दोहराया गया है कि भारतीय वैश्विक स्तर पर लघु और भेदभाव हैं परमाणु निशस्त्रीकरण के प्रति वचन बंद है ताकि परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की रचना हो |

Q. No. 3) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से 1962 तक, भारत के चीन के साथ संबंध का वर्णन कीजिए |

A. 1) 1949 की क्रांति के पश्चात भारत चीन के कम्युनिस्ट सरकार को मान्यता देने वाला पहला देश में से एक था 

A. 2) शांतिपूर्ण व्यवसाय अस्तित्व के पांच सिद्धांतों यानी पंचशील की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और चीन के प्रमुख( Chau and lie)  ने संयुक्त रूप से 29 अप्रैल 1954 में  किया  |

A. 3) भारत और चीन की नेता एक दूसरे देश का दौरा करते हैं और उसके स्वागत के में बड़ी भीड़ जुटती थी हिंदी चीनी भाई-भाई के नारे लगाए जाते थे |

A. 4) परंतु उसके पश्चात दोनों देशों के संबंध बिगड़ने शुरू हो गई क्योंकि 1950 में तिब्बत पर चीन द्वारा अधिकार करने के परिणाम स्वरुप मध्यवर्ती राज्य का अंत हो गया था प्रारंभ में भारत ने इसका विरोध नहीं किया परंतु बाद में चीन ने तिब्बत की संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास किया जिसके कारण विवश होकर तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा ने भारत से राजनीतिक सरण मांगी और भारत ने 1959 में सरण दे दी तब चीन ने भारत पर आरोप लगाया कि भारत उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है |


Q. No. 4)  भारत की  गुटनिरपेक्षता की नीति और विदेश नीति में जवाहरलाल नेहरू की भूमिका का वर्णन करें | (IMP)

A.)  किसी राष्ट्रीय का राजनीतिक नेतृत् की विदेश नीति को प्रभावित करता है जैसे कि जवाहरलाल नेहरू की भूमिका से सिद्ध होता है जो की निम्नलिखित है |

A. 1) दोनों गुटो से दूरी - जवाहरलाल नेहरू जो 1946 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे की विदेश नीति के तीन उद्देश्य थे संप्रभुता की रक्षा क्षेत्रीय अखंडता  को बनाए रखना वह गति से आर्थिक विकास करना इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उन्होंने गुटनिरपेक्षता की नीति को अपनाते हुए दोनों खेलो पश्चिमी और पूर्वी गुटो से भारत को दूर रखा इस प्रकार भारत ने मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक स्वतंत्र नीति अपनाई और दोनों खेलों के देशों से सहायता और अनुदान प्राप्त करने में सफल हुआ |

A. 2) एफ्रो एशियाई एकता - नेहरू विश्व के मामलों और विशेष रूप से ऐसे मामलों में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका के पक्ष में थे इसीलिए विदेश नीति के अंतर्गत भारत ने एशिया और अफ्रीका के नव्स्वतंत्र देश के साथ संपर्क बनाए 1940 और 1950 के दशकों में नेहरू ने एशियाई एकता पर बल दिया और निम्नलिखित सम्मेलनों की आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई |

1 ) मार्च 1947 में (स्वतंत्रता से पूर्व) एशिया संबंध सम्मेलन एशियाई रिलेशन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया |

2) भारत ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता के प्रयास किया 1959 में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संग्राम के समर्थन में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किया |

3)  1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में एफ्रो एशियाई सम्मेलन किया |

4 ) दक्षिण अफ्रीका में जारी रंगभेद का विरोध किया |

5 ) गुटनिरपेक्षता आंदोलन का प्रथम सम्मेलन 1961 के सितंबर में बेलग्रेड में आयोजित किया गया |

Q.No.5) अगर आपको भारत की विदेश नीति के बारे में फैसला लेने को कहा जाए तो आप इसकी किन दो बातों को बदलना चाहेंगे  इसी तरह यह भी बताएं कि भारत की विदेश नीति के किन्हीं दो पहलू को आप बरकरार रखना चाहेंगे अपने उत्तर के संतरिक्ष में वर्णन करें | (IMP)

A.) भारत के विदेश नीति के मुख्य तत्व निम्नलिखित है |

1) गुटनिरपेक्षता की नीति |

2) रूस के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध |

3) वैश्विक स्तर पर लागू और भेदभाव हैं परमाणु निशस्त्रीकरण के प्रति वचन बंद |

4) संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्वास |

उपरोक्त विदेश नीति में से में इसकी निम्नलिखित दो बातों को बदलने के पक्ष में हूं |

1)  गुटनिरपेक्ष की नीति और संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्वास |

उपरोक्त तत्वों में परिवर्तन की आवश्यकता के निम्नलिखित कारण है |

गुटनिरपेक्षता की नीति शीत युद्ध के संदर्भ में प्रारंभ हुई थी 1990 के दशक की शुरुआती वर्षों में शीत युद्ध का अंत और सोवियत संघ का विघटन हुआ इस घटनाओं के पश्चात किसी एक गुट में शामिल होने का प्रयास समाप्त हो गया है अब केवल अमेरिका ही एक महाशक्ति है तथा मूल भावना के रूप में गुटनिरपेक्षता की प्रासंगिकता तथा प्रभावकारिता में कमी आई है इस प्रकार इसमें परिवर्तन की आवश्यकता है |

अमेरिका के एक महाशक्ति होने के कारण उसकी मनमानी बढ़ गई है संयुक्त राष्ट्र संघ का भी अंतरराष्ट्रीय विवादों को हल करने के योगदान में कमी आई है विशेष कर ऐसे विवादों में जिनका संबंध अमेरिका से होता है तथा संघ में नीति में परिवर्तन की जरूरत है |



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